श्रीमद्भागवत गीता क्या है? भगवत गीता में कितने श्लोक है? Shrimad Bhagavad gita

Shrimad Bhagvad Gita - Mahabharat - Quotes book - in Hindi - English pdf

Bhagavad gita in Hindi

श्रीमद्भागवत गीता क्या है? What is Bhagwat gita

महाभारत के युद्ध में अर्जुन के धर्मनिरपेक्ष हो जाने पर श्री कृष्ण ने अपने मुख कमल से जिस अमृत रूपी श्रीमद्भागवत गीता का उद्भव कर अर्जुन को पान करवाया। जिसके सेवन मात्र से जीवन के वास्तविक लक्ष्य की प्राप्ति हो जाती है। जिसके प्रारम्भ से लेकर अंत तक जीवन का सार ही मुख्य है। जिसपर अमल कर मानव अपने जीवन का सृजन व विसर्जन कर सकता है उसे ही श्रीमद्भागवत गीता कहते हैं। 

श्रीमद्भागवत गीता महाभारत के किस पर्व का हिस्सा है? 

गीता महाभारत के भीष्म पर्व से लिया गया है परन्तु ये स्वयं में सारे जगत को समेटे है, अर्थात जिस प्रकार पुरे वृक्ष का मूल उसके जड़ को माना जाता है ठीक इसी प्रकार महाभारत का मूल श्रीमद्भागवत गीता को ही कहा जाता है।

श्रीमद्भागवत गीता पढ़ने के लाभ क्या हैं?

श्रीमद्भागवत गीता इस जगत के लिए अमृत से कोई कम नही जिसके पान से इंसान को आध्यात्म जगत की प्राप्ति होती है। जिसके पढ़ने मात्र से मोक्ष के दरवाजे खुले जाते है जिसके पढ़ने से धर्म-अधर्म सत्य-असत्य,न्याय-अन्याय,उचित-अनुचित,ज्ञान-अज्ञान,कर्मयोग भक्ति योग ज्ञानयोग का पता चलता है। 

श्रीमद्भागवत गीता में कितने श्लोक हैं? Gita me kitne shlok hai:

महाभारत के भीष्म पर्व से लिए गए इस पावन पुनीत ग्रन्थ में कुल 800 श्लोक हैं। जिनमे से 574 श्लोक श्री कृष्ण भगवान के मुखारविंद से उद्भव हैं। जिनमे से गीता के 85 श्लोक अर्जुन के द्वारा किये गए संवाद रूप में हैं। व 1 श्लोक हस्तिनापुर के राजा धृतराष्ट्र द्वारा पूछे प्रश्नों के हैं। एवं गीता के 54 श्लोक धृतराष्ट्र के सामंत द्वारा कहे गए हैं। 

गीता के प्रथम श्लोक कौन से हैं? Gita ka pratham shloka:

गीता के प्रथम श्लोक हस्तिनापुर के राजा धृतराष्ट्र द्वारा संजय से पूछे गए प्रश्नों के हैं जो निम्न हैं- 

धर्म क्षेत्रे कुरु क्षेत्रे समवेता युयुत्सव:। मामका: पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय।

अर्थात- हे संजय इस धर्म भूमि कुरुक्षेत्र में इकट्ठे हुए युद्ध की इच्छा बाले मेरे और पाण्डुके पुत्रों(पांडवो) ने क्या किया? 

गीता के अंतिम श्लोक कौन से हैं? Gita ke antim shloka:

गीता के अंतिम श्लोक धृतराष्ट्र सामंत द्वारा उक्त निम्न हैं- 

 यत्र योगेश्वर: कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धर:। तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम ।।

अर्थात- संजय ने धृतराष्ट्र के प्रथम श्लोकों में किये गूढ़ प्रश्नों का उत्तर अंतिम श्लोकों में देते हुए कहते हैं कि- जहां योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण है और जहां गांडीवधारी अर्जुन है वहाँ ही श्री विजय विभूति और अचल नीति है ऐसा मेरा मत है अर्थात जीत उनकी ही निश्चित है। 

गीता जयंती कब मनाई जाती है? Gita jayanti kab manayi jati hai:

गीता जयंती प्रत्येक वर्ष मार्गशीष(माघ) मास के शुक्ल पक्ष में एकादशी को मनाई जाती है। 

गीता के उपनाम क्या हैं? Gita ke upnam:

गीता को वैदिक साहित्य एवं उपनिषद भी कहते हैं।

मोक्षदा एकादशी क्या है? Mokshda Ekadashi :

कहा जाता है कि जब रण में कुंती पुत्र पार्थ(अर्जुन) सहित सम्पूर्ण संसार को जब माघ शुक्लपक्ष एकादशी को गीता का ज्ञान दिया गया तो इसी पवन पुनीत अवसर को हर्षोल्लास के साथ मोक्षदा एकादशी का नाम दिया।

मोक्षदा एकादशी करने का क्या महत्व है?

कहा जाता है कि जिस दिन सम्पूर्ण जगत को सृष्टि को एक आधार की प्राप्ति मिली अगर उस दिन प्रातः काल स्नान कर व्रत रखकर एवं श्रीमद्भागवत गीता परायण कर कृष्ण जी का भजन करने से वो प्रसन्न होते हैं।और ऐसा भी माना जाता है कि मोक्षदाएकादशी करने पर कृष्ण भगवान उनकी सारी इच्छाएं पूर्ण करते हैं और उस मनुष्य को सद्गति की प्राप्ति होती है।


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