शेरशाह सूरी का शासनकाल | sher-shah-suri-in-hindi-tomb-history

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भारतवर्ष पिछले कई दशकों से गुलामों का देश रह चुका है। कभी मुगलों ने तो कभी अंग्रेजों ने और ना जाने कितनों ने भारत को गुलाम बनाया।

इन्हीं मुगलों में से एक था शेरशाह सूरी,  जिन्होंने खुद मुगल सम्राटों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उसने 1540 ई. में मुगल सम्राट हुमायूं को हराकर उत्तर भारत में सूरी साम्राज्य की स्थापना की।


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प्रारंभिक जीवन :

शेरशाह सूरी कौन था ? शेरशाह का जन्म पंजाब में स्थित बजवाड़ा नामक गांव में हुआ था। उसके पिता हसन खाँ सासाराम (बिहार) के जागीरदार थे। 

शेरशाह का असल जीवन में नाम फरीद खाँ था। परंतु लोग उसे शेरशाह के नाम से जानते थे। दरअसल उसने दक्षिण बिहार के सूबेदार बाहार खान लोहानी को एक शेर के आक्रमण से बचाया और उसने अकेले ही शेर को मार गिराया। इसी उपलक्ष्य में बहार खान ने उसे शेर खान की उपाधि दी।

बड़ी फुर्ती एवं बहादुरी से शेरशाह ने शेर को मार गिराया था। शेरशाह अरबी तथा फारसी भाषा का अच्छा ज्ञाता था। उसने प्रशासन की जानकारी पिता की जागीर के प्रबंध से ही प्राप्त किया था। अपने पिता की मृत्यु के बाद वह स्वयं अपने पिता की जगह सासाराम का जागीरदार बन गया।

अपनी सैन्य प्रतिभा की बदौलत 1529 ई. में वह बिहार का शासक बन गया। चुनार के किले पर कब्जे को लेकर उसका हुमायूं के साथ पहला संघर्ष हुआ। कन्नौज की निर्णायक लड़ाई में जीत हासिल कर शेरशाह दिल्ली का शासक बन गया। 

 

शेरशाह का प्रशासन :

शेरशाह का केंद्रीय प्रशासन प्रजा के कल्याण की भावना से प्रेरित था। वह सभी विभागों के कार्यों को स्वयं दिखता था। उसके मंत्री स्वयं निर्णय नहीं लेते थे बल्कि केवल उसकी आज्ञाओं का पालन करते थे। वे शेरशाह को केवल सलाह दे सकते थे, परंतु उसे मनाना या ना मनाना सिरसा की इच्छा पर निर्भर था।

वह प्रत्येक विभाग की छोटी सी छोटी रिपोर्ट को स्वयं पढ़ता था। उसका प्रशासन केंद्रीय एवं प्रांतीय शासन व्यवस्था में बटा हुआ था। प्रशासक के रूप में उसे अकबर का पूर्वगामी माना जाता है। सिरसा स्वयं सैनिकों की भर्ती करता था।

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उसने सैनिकों की 'हुलिया' रखने तथा घोड़ों को दागने की प्रथा पुनः चलायी। सैनिकों को नकद वेतन दिया जाता था। उन्हें राज्य के विभिन्न भागों में रखा जाता था।
  

शेरशाह एक न्यायप्रिय शासक :


उसने किसानों को भूमि का पट्टा दिया। जिसमें भूमि का क्षेत्रफल, स्थिति, प्रकार और मालगुजारी दर्ज रहती थी। लगान नकद या जीसं (अनाज) दोनों रूप में देने की छूट थी।

शेरशाह का एक न्यायप्रिय शासक था। वह प्रत्येक बुधवार की शाम को स्वयं निर्णय करने बैठता था। काजी असैनिक मुकदमों का निर्णय करते थे। गांव के मुकदमें ग्राम पंचायतों द्वारा निपटाए जाते थे।

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शेरशाह ने व्यापार वाणिज्य के क्षेत्र में पुरानी और खोटी मुद्राओं को प्रचलन से हटा दिया और उनके स्थान पर सोने चांदी और तांबे की मुद्राएं चलायी। शेरशाह के समय 23 टाकसालें थी। उसकी मुद्राएँ वृत्ताकार तथा वर्गाकार थी।

सिक्कों पर अरबी लिपि में शेरशाह का नाम, पदवी और टकसाल का नाम अंकित रहता था। कुछ मुद्राओं पर शेरशाह का नाम देवनागरी लिपि में भी अंकित रहता था। शेरशाह के प्रशासन की एक महान उपलब्धि सड़कों तथा सरायों का निर्माण करना था।

उसने राजधानी तथा मुख्य नगरों को जोड़ने वाली सड़कों का निर्माण कराया। इससे साम्राज्य के सिदृढ़ीकरण के साथ व्यापार तथा आवागमन की भी उन्नति हुई। कलकत्ता से पेशावर तक बनाया गया ग्रैंड ट्रंक रोड उसके दिमाग की बड़ी उपज थी। यह सड़क झारखंड से भी होकर गुजरती है।

इसे राष्ट्रीय राजमार्ग - 2 के नाम से जाना जाता है। शेरशाह ने मार्गों में प्रत्येक 2 कोस पर एक सराय का निर्माण कराया। जहाँ ठहरने और भोजन की व्यवस्था सरकार द्वारा की जाती थी। प्रत्येक सराय में चौकीदार डाक सेवक और दो घोड़े सदैव तैयार रहते थे।

इन सरायों का डाक चौकी के रूप में भी प्रयोग होता था। शेरशाह की इन्हीं सड़कों तथा सरायों को 'साम्राज्य की धमनियाँ' कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि उसने करीब 1700 सरायों निर्माण कराया था। 

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शेरशाह सूरी का मकबरा
   
सड़कों तथा सरायों के अतिरिक्त उसने अनेक भवनों और कई अस्पतालों का भी निर्माण कराया। सैनिक तथा असैनिक क्षेत्रों में उसकी उपलब्धियां काबिल - ए - तारीफ है।

शेरशाह सूरी का शासनकाल (1540-1545) :


उसे प्रशासन के लिए करीब 5 वर्षों का ही समय मिल सका। उसका शासनकाल 1540 ई. से 1545 ई. तक का था। लेकिन इस सीमित समय में ही उसने कई बड़े काम कीए। यह ठीक कहा गया है कि जिस कुशल प्रशासन तंत्र की स्थापना उसने की थी उसका लाभ मुगलों को प्राप्त हुआ और उसके कारण ही मुगल साम्राज्य को स्थापित्व प्राप्त हुआ। 

इतिहासकार वुल्लजे हेग ने शेरशाह को भारत का महानतम शासक बताया है। शेरशाह के शासन प्रबंध की जानकारी अब्बास खास सरवानी द्वारा लिखित पुस्तक तारीख - ए - शेरशाही से मिलती है।



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