छत्रपति शिवाजी महाराज कौन थे? Who was Chhatrapati Shivaji Maharaj

Chhatrapati Sivaji Maharaj

Who was Chhatrapati Shivaji Maharaj?
Chhatrapati Sivaji Maharaj,छत्रपति शिवाजी महाराज
Chhatrapati Sivaji Maharaj

मराठा साम्राज्य :

मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज एक महान राजा थे। इन्होंने ही मराठा साम्राज्य का गठन किया था।

अपने शातिर रणनीति से मुग़ल साम्राज्य को और औरंगजेब जैसे क्रूर शासक को धूल चटाने वाले महान छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 1627 ई. को पुणे के निकट शिवनेर के दुर्ग में हुआ था।

उनके पिता का नाम शाहजी भोंसले और माता का नाम जीजाबाई था। उनका बचपन उनकी माता जिजाऊ मां साहेब के मार्गदर्शन में बीता। शिवाजी के व्यक्तित्व पर सर्वाधिक प्रभाव उनकी माता जीजाबाई व उनके शिक्षक व संरक्षक दादा कोंडदेव का था।


छत्रपति शिवाजी का बचपन :

वे सभी कलाओं में माहिर थे, उन्होंने बचपन में  ही राजनीति एवं युद्ध कला सीख ली थी। शिवाजी महाराज के चरित्र पर माता-पिता का बहुत प्रभाव पड़ा। बचपन से ही वे उस युग के वातावरण और घटनाओं को भली प्रकार से समझने लगे थे।



Chhatrapati Sivaji Maharaj



छत्रपति शिवाजी का संकल्प :

उन्होंने कुछ स्वामीभक्त साथियों का संगठन किया। अवस्था बढ़ने के साथ विदेशी शासन की बेड़ियां तोड़ फेंकने का उनका संकल्प प्रबल होता गया। और उन्होंने मुगल साम्राज्य से भारत को आजाद करने की ठान ली।

विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए उन्होंने एक शक्तिशाली साम्राज्य की स्थापना की। शिवाजी ने मुगल शक्ति को कड़ी चुनौती दी। उनकी राजधानी रायगढ़ थी, रायगढ़ में अपना राज्यभिषेक कर उन्होंने छत्रपति की उपाधी धारण की।

उनके मंत्रिमंडल को अष्टप्रधान कहा जाता था। उसके दरबार में मराठी भाषा को अपनाया गया था। उन्होंने कुशल प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की थी। उनके सैन्य प्रशासन में दुर्ग, तोपखाना, नौसेना, घुड़सवार और पैदल सेना सम्मिलित हैं। अश्वारोही सेना के संगठन को पागा एवं पैदल सेना को पाईक कहा जाता था।



छत्रपति शिवाजी महाराज

मराठा साम्राज्य (Maratha empire)

शिवाजी के नेतृत्व में मराठा शक्ति का उत्थान मध्यकालीन भारत के इतिहास की महत्वपूर्ण घटना थी। मराठों का राजनीतिक उत्कर्ष औरंगजेब के शासनकाल में हुआ। मराठों के उत्कर्ष के निम्नलिखित कारण थे।
  1. महाराष्ट्र की भौगोलिक स्थिति जटिल थी। यह पहाड़ों, नदियों, जंगलों एवं अनुपजाऊ भूमि वाले क्षेत्र था। इस कारण यहाँ के लोग जुझारू होते थे।
  2. मराठी पहाड़ी प्रदेश होने के कारण स्वस्थ्य एवं वरिष्ठ होते थे।
  3. मराठी छापामार युद्ध शैली में काफी निपुण थे।

पेशवाओं की देखरेख में मराठों ने एक अत्यंत सफल सैन्य संगठन खड़ा कर लिया। शिवाजी के मृत्यु के बाद क्रमशः सामाजिक राजाराम, ताराबाई एवं छत्रपति साहू ने मुगलों से संघर्ष कर दक्कन-मध्य भारत और उत्तरी भारत में अपनी सत्ता का विस्तार किया। पेशवा बालाजी विश्वनाथ बाजीराव प्रथम और बालाजी बाजीराव ने मराठा शक्ति के विकास को चरमोत्कर्ष तक पहुंचा दिया। 

दक्कन प्रायद्वीप पर अधिकार के साथ ही मराठों को चौथ एवं सरदेसीमुखी कर वसूलने का अधिकार मिल गया। मराठों ने अपने नियंत्रण क्षेत्र में व्यापार के कई मार्ग खोलें। पानीपत के तृतीय युद्ध में मराठों की पराजय ने उनकी महत्वाकांक्षा को झकझोर कर रख दिया।

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