मध्यकालीन भारत का इतिहास | History of medieval india in hindi

                History of India in Hindi 


इतिहास हजारों साल पहले मानव की विकास यात्रा की कहानी है। इतिहास के विभिन्न समय सीमा को समझने के लिए इसे तीन कालखंडों में बांँटा गया है, प्राचीन काल, मध्यकाल एवं आधुनिक। तो आज हम लोग भारत के मध्यकालीन इतिहास का अध्ययन करेंगे। भारतीय इतिहास का मध्यकाल लगभग 1000 वर्षों का है। इन 1000 वर्षों में भारत में कई सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तन हुए। इन परिवर्तनों की पड़ताल इतिहास के विकाससमान धारा को समझने के लिए जरूरी है।


किसी भी क्षेत्र के इतिहास की जानकारी के लिए वहांँ की भौगोलिक परिस्थितियों को जानना आवश्यक है। भौगोलिक जानकारी के लिए मानचित्र एक सशक्त माध्यम है। प्राचीन भारत में मानचित्रकारी का ज्ञान अविकसित था। व्यापार एवं साम्राज्य के विस्तार ने मानचित्र की आवश्यकता को जन्म दिया। मानचित्र के विकास का श्रेय अरब एवं यूरोप के भूगोलवेताओं को जाता है। मानचित्र के माध्यम से वहां के व्यापारियों ने भारत आकर मानचित्र की महत्ता को प्रति भारतीयों में रुचि जगाई।

मध्यकालीन भारत का इतिहास

Al idrisi

चित्र-1 अल-इद्रीसी का बनाया हुआ दुनिया के नक्शे का एक हिस्सा जिसमें भारतीय उपमहाद्वीप को दिखाया गया है।

यह मानचित्र अरब के भूगोलवेत्ता अल-इद्रीसी के द्वारा 1154 ई. में बनाए गए विश्व मानचित्र में भारतीय उपमहाद्वीप को दर्शाता है। इस मानचित्र में आपको दक्षिण भारत का इलाका वर्तमान उत्तर भारत के क्षेत्र में दिखाया गया है। श्रीलंका के द्वीप भी इस मानचित्र के ऊपरी हिस्से में अंकित है।
मध्यकालीन भारत का इतिहास
Giwalam the lisle
चित्र-2 18वीं सदी के आरंभ में ग्विलाँम द लिस्ले के एटलस नूवो के अनुसार भारतीय उपमहाद्वीप।
यह मानचित्र फ्रांस के महान चित्रकार ग्वालाँम द लिस्ले के द्वारा 1720 ई. में बनाए गए विश्व के नक्शे से लिया गया है। इसमें भी भारतीय उपमहाद्वीप को दिखाया गया है, लेकिन दोनों मानचित्र में काफी अंतर है। इसका कारण यह है कि दोनों चित्रों को बनाए जाने के कालाविधि में उपमहाद्वीप के बारे में सूचनाएं काफी बदल गई थी। चित्र-2 भारतीय उपमहाद्वीप के वर्तमान मानचित्र से काफी मिलता-जुलता है।

History of India, Mugal samrajya... 

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